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साईं के ये 11 वचन करते हैं हर समस्या का समाधान, राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197,srbh shrm

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राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197 साईं के ये 11 वचन करते हैं हर समस्या का समाधान साईं बाबा और उनकी महिमा: -  साईं बाबा  को एक चमत्कारी पुरुष, अवतार और भगवान का स्वरुप माना जाता है. - इनको भक्ति परंपरा का प्रतीक माना जाता है. - साईं बाबा का जन्म और उनसे जुड़ी दूसरी चीजें अभी अज्ञात हैं. - इनका मूल स्थान महाराष्ट्र का शिरडी है, जहां पर भक्त इनके स्थान के दर्शन के लिए जाते हैं. - साईं को हर धर्म में मान्यता प्राप्त है, हर धर्म के मानने वाले साईं में आस्था रखते हैं. - साईं की उपासना बृहस्पतिवार के दिन विशेष रूप से की जाती है. - मुख्यतौर पर तीन रूपों में की जाती है साईं की उपासना. - चमत्कारी पुरुष के रूप में, भगवान के रूप में और गुरु के रूप में. - गुरु के रूप में इनकी पूजा उपासना सबसे उत्तम होती है. साईं बाबा का जीवन दर्शन और उपदेश: - साईं बाबा ने आमतौर पर कोई पूजा पद्धति या जीवन दर्शन नहीं दिया. - एक ही ईश्वर और श्रद्धा-सबुरी पर ही उनका विशेष जोर रहा है. - लेकिन उनके ग्यारह वचन उनके भक्तों के लिए उनका दर्शन हैं. - इन ग्यारह वचनों में जीवन की हर स...

NIRJALA EKADASHI 2020

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RADHEY KRISHNA WORLD 9891158197 इस दिन मनाई जाएगी निर्जला एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत तोड़ने का सही समय साल की सभी चौबीस एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण एकादशी है. बिना पानी के व्रत को निर्जला व्रत कहते हैं और निर्जला एकादशी का उपवास किसी भी प्रकार के भोजन और पानी के बिना किया जाता है. उपवास के कठोर नियमों के कारण सभी एकादशी व्रतों में निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन होता है. इस साल निर्जला एकादशी 2 जून 2020 को मनाई जाएगी. निर्जला एकादशी व्रत को करते समय श्रद्धालु लोग भोजन ही नहीं बल्कि पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं. जो श्रद्धालु साल की सभी चौबीस एकादशियों का उपवास करने में सक्षम नहीं है उन्हें केवल निर्जला एकादशी उपवास करना चाहिए क्योंकि निर्जला एकादशी उपवास करने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ मिल जाता हैं. निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष के दौरान किया जाता है. अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत मई अथवा जून के महीने में होता है. आमतौर पर निर्जला एकादशी का व्रत गंगा दशहरा के अगले दिन पड़ता है परन्तु कभी कभी साल में गँगा...

APRA EKADASHI 18 MAY 2020

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RADHEY KRISHNA WORLD 9891158197 अपरा एकादशी  अपरा एकादशी अजला और अपरा दो नामों से जानी जाती है। इस दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा का विधान है। अपरा एकादशी का एक अर्थ यह कि इस एकादशी का पुण्य अपार है। इस दिन व्रत करने से कीर्ति, पुण्य और धन की वृद्धि होती है। वहीं मनुष्य को ब्रह्म हत्या, परनिंदा और प्रेत योनि जैसे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन तुलसी, चंदन, कपूर, गंगाजल से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। अपरा एकादशी व्रत पूजा विधि अपरा एकादशी का व्रत करने से लोग पापों से मुक्ति पाकर भवसागर से तर जाते हैं। इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है: 1.  अपरा एकादशी से एक दिन पूर्व यानि दशमी के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। 2.  एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान के बाद भगवान विष्ण का पूजन करना चाहिए। पूजन में तुलसी, चंदन, गंगाजल और फल का प्रसाद अर्पित करना चाहिए। 3.  व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन छल-कपट, बुराई और झूठ नहीं बोलना चाहिए। इस दिन चावल खाने की भी मनाही होती है।...

HANUMAN JI VRAT KHATHA ,BAJRANGWALI KHATHA , MANGAL VAAR VRAT KHATHA.

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RADHEY KRISHNA WORLD:9891158197 श्री हनुमान! मंगलवार व्रत कथा एक समय की बात है एक ब्राह्मण दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी, जिस कारण वह बेहद दुखी थे। एक समय ब्राह्मण वन में हनुमान जी की पूजा के लिए गया। वहां उसने पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना की। घर पर उसकी स्त्री भी पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत करती थी। वह मंगलवार के दिन व्रत के अंत में हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करती थी। एक बार व्रत के दिन ब्राह्मणी ना भोजन बना पाई और ना ही हनुमान जी को भोग लगा सकी। उसने प्रण किया कि वह अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करेगी। वह भूखी प्यासी छह दिन तक पड़ी रही। मंगलवार के दिन वह बेहोश हो गई। हनुमान जी उसकी निष्ठा और लगन को देखकर प्रसन्न हुए। उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप ब्राह्मणी को एक पुत्र दिया और कहा कि यह तुम्हारी बहुत सेवा करेगा। बालक को पाकर ब्राह्मणी अति प्रसन्न हुई। उसने बालक का नाम मंगल रखा। कुछ समय उपरांत जब ब्राह्मण घर आया, तो बालक को देख पूछा कि वह कौन है? पत्नी बोली कि मंगलवार व्रत से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उसे यह बालक ...

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, पूजा विधि

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राधे कृष्णा वर्ल्ड  मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, पूजा विधि  प्रत्येक माह की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता हैं की फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मध्य रात्रि में भगवान शिव “लिंग” के रूप में प्रकट हुए थे और श‍िवलिंग की पहली बार पूजा अर्चना भगवान विष्णु और ब्रह्माजी द्वारा सम्पन्न हुई थी।  इसलिए फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महा शिवरात्रि मनाई जाती है जबकि अन्य सभी कृष्ण चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसानी से हो जाता है। इस दिन जो भी कन्याएं मनोवांछित वर पाना चाहती हैं या जिनके विवाह में किसी भी प्रकार की रुकावटें आ रही हैं, वह अगर यह मासिक शिवरात्रि का व्रत करें तो उनकी हर समस्या दूर हो जाती है। शिवपुराण में कहा गया है की इस दिन जो भी सच्चे मन से व्रत करता है उसकी हर इच्छा पूरी हो जाती हैं|  मासिक शिवरात्रि व्रत कथा एक बार एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्र...