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क्यों दी जाती है दक्षिणा? क्यों इसके बिना यज्ञ में फल नहीं मिलता? RADHEY KRISHNA WORLD 9891158197
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RADHEY KRISHNA WORLD 9891158197 क्यों दी जाती है दक्षिणा? क्यों इसके बिना यज्ञ में फल नहीं मिलता? दान-पुण्य करते वक्त ब्राह्मणों को दक्षिणा दी जाती है. आजकल इस दक्षिणा से मतलब महंगे सामान या रुपयों से है. लेकिन प्राचीन काल में शिक्षा पूरी होने के बाद विद्यार्थी अपने गुरुओं को दक्षिणा दिया करते थे. यह कुछ भी हुआ करती थी जैसे एकलव्य ने अपने गुरु ‘द्रोण’ को दक्षिणा में अपना अंगूठा काटकर दे दिया था. ऐसे ही बाकि छात्र भी अपनी-अपनी योग्यता के हिसाब से अपने गुरु को कुछ ना कुछ दान में अवश्य दिया करते थे. ये दक्षिणा देने की प्रथा कहां से शुरु हई? इसके पीछे क्या कारण है? इन सलावों के जवाब आपको इस कथा में मिल जाएंगे. प्राचीन कथा श्री कृष्ण और लक्ष्मी जी से जुड़ी हुई है. गोलोक में भगवान कृष्ण को सुशीला नामक गोपी बहुत पसंद थी. वह उसकी विद्या, रुप और गुणों से प्रभावित थे. सुशीला राधाजी की ही सखी थीं. श्रीकृष्ण द्वारा सुशीला को पसंदQUES करने की बात राधा को पसंद नही थी. इसीलिए उन्होंने सुशीला को गोलोक से बाहर निकालवा दिया. इस बात से सुशीला को बहुत दुख हुआ और वो कठिन तप करने लगी. इस तप स...
KAMKHAYA MANDIR KI KAHANI RADHEY KRISHNA WORLD SRBHSHRM 9891158197
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राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197 TEMPLE STORY 4 कामाख्या मंदिर की पूरी कहानी प्रचलित कथा के अनुसार देवी सति ने भगवान शिव से शादी की. इस शादी से सति के पिता राजा दक्ष खुश नहीं थे. एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया लेकिन इसमें सति के पति भगवान शिव को नहीं बुलाया.असम के गुवाहाटी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है देवी सती का कामाख्या मंदिर. इस मंदिर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. लेकिन 51 शक्तिपीठों में से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाला यह मंदिर रजस्वला माता की वजह से ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है. यहां चट्टान के रूप में बनी योनि से रक्त निकलता है. देवी सति ने भगवान शिव से शादी की. इस शादी से सति के पिता राजा दक्ष खुश नहीं थे. एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया लेकिन इसमें सति के पति भगवान शिव को नहीं बुलाया. सति इस बात से नाराज़ हुईं और बिना बुलाए अपने पिता के घर पहुंच गई. इस बात पर राजा दक्ष ने उनका और उनके पति का बहुत अपमान किया. अपने पति का अपमान उनसे सहा नहीं गया और हवन कुंड में कूद गई.इस बात का पता चलते ही भगवान शिव भी यज्ञ में पहुंचे और सति का...
मीरा चरित (17),राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197
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राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197 मीरा चरित (17) क्रमशः से आगे............ बड़े पिताजी और बड़ी माँ के यूँ मीरा से सीधे सीधे ही मेवाड़ के राजकुवंर भोजराज से विवाह के प्रस्ताव पर मीरा का ह्रदय विवशता से क्रन्दन कर उठा ।वह शीघ्रता पूर्वक कक्ष से बाहर आ सीढ़ियाँ उतरती चली गई ।वह नहीं चाहती थी कि कोई भी उसकी आँखों में आँसू भी देखे ।जिसने उसे दौड़ते हुए देखा , चकित रह गया , ब्लकि पुकारा भी ,पर मीरा ने किसी की बात का उत्तर नहीं दिया । मीरा अपने ह्रदय के भावों को बाँधे अपने कक्ष में गई और धम्म से पलंग पर औंधी गिर पड़ी ।ह्रदय का बाँध तोड़ कर रूदन उमड़ पड़ा -" यह क्या हो रहा है मेरे सर्वसमर्थ स्वामी ! अपनी पत्नी को दूसरे के घर देने अथवा जाने की बात तो साधारण- से-साधारण , कायर-से- कायर राजपूत भी नहीं कर सकता ।शायद तुमने मुझे अपनी पत्नी स्वीकार ही नहीं किया , अन्यथा ................... । हे गिरिधर ! यदि तुम अल्पशक्ति होते तो मैं तुम्हें दोष नहीं देती ।तब तो यही सत्य है न कि तुमने मुझे अपना माना ही नहीं ..........
मीरा चरित (16), राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197
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राधेकृष्णावर्ल्ड 9891158197 मीरा चरित (16) क्रमशः से आगे ................ यों तो मेड़ते के रनिवास में गिरिजा जी , वीरमदेव जी ( दूदा जी के सबसे बड़े बेटे ) की तीसरी पत्नी थी ,किन्तु पटरानी वही थी ।उनका ऐश्वर्य देखते ही बनता था ।पीहर से उनके विवाह के समय में पचासों दास दासियाँ साथ आये थे और परम प्रतापी हिन्दुआ सूर्य महाराणा साँगा की लाडली बहन का वैभव एवं सम्मान यहाँ सबसे अधिक था ।पूरे रनिवास में उनकी उदार व्यवहारिकता में भी उनका ऐश्वर्य उपस्थित रहता । मीरा उनकी बहुत दुलारी बेटी थी ।ये उसकी सुन्दरता , सरलता पर जैसे न्यौछावर थी ।बस, उन्हें उसका आठों प्रहर ठाकुर जी से चिपके रहना नहीं सुहाता था ।किसी दिन त्योहार पर भी मीरा को श्याम कुन्ज से पकड़ कर लाना पड़ता ।मीरा को बाँधने के तो दो ही पाश थे ,भक्त -भगवत चर्चा अथवा वीर गाथा । जब भी गिरिजा जी मीरा को पाती , उसे बिठाकर अपने पूर्वजों की शौर्य गाथा सुनाती ।मीरा को वीर और भक्तिमय चरित्र रूचिकर लगते । रात ठाकुर जी को शयन करा कर मीरा उठ ही रही थी कि गिरिजा जी की दासी ने आकर संदेश दिया -"बड़े कुँवरसा आपको बु...