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RADHEY KRISHNA WORLD. कृष्ण का वो पुत्र जिसके कारण सम्पूर्ण यदुवंश का नाश हो गया!!!!!! साम्ब कृष्ण और उनकी दूसरी पत्नी जांबवंती के ज्येष्ठ पुत्र थे जिसका विवाह दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से हुआ था। जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तो गांधारी ने कृष्ण को इसका दोषी मानते हुए यदुकुल के नाश का श्राप दे दिया जिसे कृष्ण ने सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने ये भी कहा कि समय आने पर वे और बलराम स्वयं यदुकुल का नाश कर देंगे।  हालाँकि किसी ने उस समय ये नहीं सोचा था कि कृष्ण के कुल का नाश उनके अपने पुत्र साम्ब के कारण होगा। महाभारत को समाप्त हुए ३६ वर्ष बीत चुके थे। एक बार महर्षि दुर्वासा एवं अन्य ऋषि द्वारका पधारे। ऋषियों का इतना बड़ा झुण्ड देख कर साम्ब और उनके मित्रों ने उनसे ठिठोली करने की सोची।  उन्होंने साम्ब को एक स्त्री के रूप में सजाया और उसका मुख ढँक कर महर्षि दुर्वासा के पास ले गए। उन्होंने महर्षि को प्रणाम कर उनसे कहा - "हे महर्षि! हमारी ये सखि गर्भवती है। आपलोग तो सर्वज्ञानी हैं अतः भविष्यवाणी कर के ये बताइये कि इसे प्रसव में पुत्र होगा अथवा पुत्री। " इस प्रकार के परिह...

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RADHEY KRISHNA WORLD  "राधाजी का काजल" आज ललिता जू प्रिया जू का श्रृंगार कर रही हैं जब श्रृंगार पूर्ण हो गया तो प्रिया जू को दर्पण सेवा करायी विशाखा जू ने किशोरी जू ने जब अपने मुख चन्द्र को दर्पण मैं निहारा तो ललिता जू की ओर देखने लगी। आज ललिता जू ने श्रृंगार मैं त्रुटि कर दी थी ‘ललिते आज आप काजल लगानो भूल गयी‘ ललिता जू बोली ‘लाडो जब काजल श्यामसुंदर की याद मैं आँखन सौ बह ही  जानो है तो लगावे को लाभ हू कहा है, आप कह रही हो तो लगाय दुगीं नेक आँख तो बन्द करो‘ प्रिया जू ने आँख बन्द की ललिता जू ने ईशारे से ठाकुर जी को अन्दर बुला लिया ओर प्रिया जू के सामने ठाकुर जी को खड़ा कर दिया। किशोरी जू ने जब नेत्र खोले ओर प्राणवल्लभ नन्दनन्दन को सामने पाया तो ह्रदय प्रैम रस से भर गया रोम-रोम से दिव्य प्रेमरस स्फुरित होने लगा किन्तु अगले ही पल किशोरी सहज हो रोष प्रकट करते हुऐ ललिता जू से बोली ‘आपने यह काह कियो मैया कि आज्ञा को हू भय नाय रह्यो आपकू जो आप इनकू महल के अन्दर ले आयीं ‘ललिता जू हाथ जोड़ के बोली ‘लाडो आप दोऊन को हाल हमसौ देखो नाय जा रह्यो यहाँ आप व्याकुल ओर श्यामसुंदर ने तो भोज...

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RADHEY KRISHNA WORLD : 9891158197 कैसे हुई थी राधा की मृत्यु, श्रीकृष्ण ने क्यों तोड़ दी थी बांसुरी? राधा श्रीकृष्ण का बचपन का प्यार थीं. श्रीकृष्ण जब 8 साल के थे तब दोनों ने प्रेम की अनुभूति की. राधा श्रीकृष्ण के दैवीय गुणों से परिचित थीं. उन्होंने जिंदगी भर अपने मन में प्रेम की स्मृतियों को बनाए रखा. यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण को केवल दो ही चीजें सबसे ज्यादा प्रिय थीं. ये दोनों चीजें भी आपस में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई थीं- बांसुरी और राधा. कृष्ण की बांसुरी की धुन ही थी जिससे राधा श्रीकृष्ण की तरफ खिंची चली गईं. राधा की वजह से श्रीकृष्ण बांसुरी को हमेशा अपने पास ही रखते थे. भले ही श्रीकृष्ण और राधा का मिलन नहीं हो सका लेकिन उनकी बांसुरी उन्हें हमेशा एक सूत्र में बांधे रही. श्रीकृष्ण के जितने भी चित्रण मिलते हैं, उनमें बांसुरी जरूर रहती है. बांसुरी श्रीकृष्ण के राधा के प्रति प्रेम का प्रतीक है. वैसे तो राधा से जुड़ीं कई अलग-अलग विवरण मौजूद हैं लेकिन एक प्रचलित कहानी नीचे दी गई है. भगवान श्रीकृष्ण से राधा पहली बार तब अलग ...

GANPATI MANTRA ,

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RADHEY KRISHNA WORLD :9891158197 श्री गणपति अथर्वशीर्ष  (पढ़ें हिन्दी अर्थ‍सहित) श्री गणपति अथर्वशीर्ष   ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि त्वमेव केवलं कर्ताऽ सि त्वमेव केवलं धर्ताऽसि त्वमेव केवलं हर्ताऽसि त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।। अर्थ- ॐकारापति भगवान गणपति को नमस्कार है। हे गणेश! तुम्हीं प्रत्यक्ष तत्व हो। तुम्हीं केवल कर्ता हो। तुम्हीं केवल धर्ता हो। तुम्हीं केवल हर्ता हो। निश्चयपूर्वक तुम्हीं इन सब रूपों में विराजमान ब्रह्म हो। तुम साक्षात नित्य आत्मस्वरूप हो।                           ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।। मैं ऋत न्याययुक्त बात कहता हूं। सत्य कहता हूं। अव त्व मां। अव वक्तारं। अव श्रोतारं। अव दातारं। अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं। अव पश्चातात। अव पुरस्तात। अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्। अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।। सर्वतो मां पाहि-पाहि समंतात्।।3।। हे पार्वतीनंदन...