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RADHEY KRISHNA WORLD : 9891158197 कैसे हुई थी राधा की मृत्यु, श्रीकृष्ण ने क्यों तोड़ दी थी बांसुरी? राधा श्रीकृष्ण का बचपन का प्यार थीं. श्रीकृष्ण जब 8 साल के थे तब दोनों ने प्रेम की अनुभूति की. राधा श्रीकृष्ण के दैवीय गुणों से परिचित थीं. उन्होंने जिंदगी भर अपने मन में प्रेम की स्मृतियों को बनाए रखा. यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण को केवल दो ही चीजें सबसे ज्यादा प्रिय थीं. ये दोनों चीजें भी आपस में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई थीं- बांसुरी और राधा. कृष्ण की बांसुरी की धुन ही थी जिससे राधा श्रीकृष्ण की तरफ खिंची चली गईं. राधा की वजह से श्रीकृष्ण बांसुरी को हमेशा अपने पास ही रखते थे. भले ही श्रीकृष्ण और राधा का मिलन नहीं हो सका लेकिन उनकी बांसुरी उन्हें हमेशा एक सूत्र में बांधे रही. श्रीकृष्ण के जितने भी चित्रण मिलते हैं, उनमें बांसुरी जरूर रहती है. बांसुरी श्रीकृष्ण के राधा के प्रति प्रेम का प्रतीक है. वैसे तो राधा से जुड़ीं कई अलग-अलग विवरण मौजूद हैं लेकिन एक प्रचलित कहानी नीचे दी गई है. भगवान श्रीकृष्ण से राधा पहली बार तब अलग ...

GANPATI MANTRA ,

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RADHEY KRISHNA WORLD :9891158197 श्री गणपति अथर्वशीर्ष  (पढ़ें हिन्दी अर्थ‍सहित) श्री गणपति अथर्वशीर्ष   ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि त्वमेव केवलं कर्ताऽ सि त्वमेव केवलं धर्ताऽसि त्वमेव केवलं हर्ताऽसि त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि त्व साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।1।। अर्थ- ॐकारापति भगवान गणपति को नमस्कार है। हे गणेश! तुम्हीं प्रत्यक्ष तत्व हो। तुम्हीं केवल कर्ता हो। तुम्हीं केवल धर्ता हो। तुम्हीं केवल हर्ता हो। निश्चयपूर्वक तुम्हीं इन सब रूपों में विराजमान ब्रह्म हो। तुम साक्षात नित्य आत्मस्वरूप हो।                           ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि।।2।। मैं ऋत न्याययुक्त बात कहता हूं। सत्य कहता हूं। अव त्व मां। अव वक्तारं। अव श्रोतारं। अव दातारं। अव धातारं। अवानूचानमव शिष्यं। अव पश्चातात। अव पुरस्तात। अवोत्तरात्तात। अव दक्षिणात्तात्। अवचोर्ध्वात्तात्।। अवाधरात्तात्।। सर्वतो मां पाहि-पाहि समंतात्।।3।। हे पार्वतीनंदन...

॥ श्रीहनूमन्नवरत्नपद्यमाला ॥

RADHEY KRISHNA WORLD : 9891158197 ॥ श्रीहनूमन्नवरत्नपद्यमाला ॥ श्रितजनपरिपालं रामकार्यानुकूलं धृतशुभगुणजालं यातुतन्त्वार्तिमूलम् । स्मितमुखसुकपोलं पीतपाटीरचेलं पतिनतिनुतिलोलं नौमि वातेशबालम् ॥ १॥ ....................................... दिनकरसुतमित्रं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं शिशुतनुकृतचित्रं रामकारुण्यपात्रम् । अशनिसदृशगात्रं सर्वकार्येषु जैत्रं भवजलधिवहित्रं स्तौमि वायोः सुपुत्रम् ॥ २॥ ........................................... मुखविजितशशाङ्कं चेतसा प्राप्तलङ्कं गतनिशिचरशङ्कं क्षालितात्मीयपङ्कम् । नगकुसुमविटङ्कं त्यक्तशापाख्यशृङ्गं रिपुहृदयलटङ्कं नौमि रामध्वजाङ्कम् ॥ ३॥ ................................................. दशरथसुतदूतं सौरसास्योद्गगीतं हतशशिरिपुसूतं तार्क्ष्यवेगातिपातम् । मितसगरजखातं मार्गिताशेषकेतं नयनपथगसीतं भावये वातजातम् ॥ ४॥ ............................................. निगदितसुखिरामं सान्त्वितैक्ष्वाकुवामं कृतविपिनविरामं सर्वरक्षोऽतिभीमम् । रिपुकुलकलिकामं रावणाख्याब्जसोमं मतरिपुबलसीमं चिन्तये तं ...

Hanuman Ashtottara-Shatnam Namavali

RADHEY KRISHNA WORLD : 9891158197 श्री हनुमान के 108 नाम मंत्र सुंदरकांड पाठ, हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा और बूढ़े मंगलवार में प्रमुखता से पाठ किया जाता है। ॐ आञ्जनेयाय नमः । ॐ महावीराय नमः । ॐ हनूमते नमः । ॐ मारुतात्मजाय नमः । ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः । ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः । ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः । ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः । ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः । ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः । 10 ॐ परविद्या परिहाराय नमः । ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः । ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः । ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः । ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः । ॐ भीमसेन सहायकृथे नमः । ॐ सर्वदुखः हराय नमः । ॐ सर्वलोकचारिणे नमः । ॐ मनोजवाय नमः । ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः । 20 ॐ सर्वमन्त्र स्वरूपवते नमः । ॐ सर्वतन्त्र स्वरूपिणे नमः । ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः । ॐ कपीश्वराय नमः । ॐ महाकायाय नमः । ॐ सर्वरोगहराय नमः । ॐ प्रभवे नमः । ॐ बल सिद्धिकराय नमः । ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः । ॐ कपिसेनानायकाय नमः । 30 ॐ भविष्यथ्चतुराननाय ...

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RADHEY KRISHNA WORLD : 9891158197 ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥ मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥ वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ॥ आरती ॥ आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे । रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ॥ लंका जारि असुर संहारे । सियाराम जी के काज सँवारे ॥ लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे । लाये संजिवन प्राण उबारे ॥ पैठि पताल तोरि जाग कारे । अहिरावण की भुजा उखारे ॥ बाईं भुजा असुर संहारे । दाईं भुजा सब संत उबारें ॥ सुर नर मुनि जन आरती उतरें । जय जय जय हनुमान उचारें ॥ कचंन थाल कपूर की बाती । आरती करत अंजनी माई ॥ जो हनुमानजी की आरती गावे । बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥ लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ ॥ इति संप...